Wednesday, August 14, 2013

Azaadi mubarak.. !!!



आजादी का चर्चा हुआ है आज,
हम आज़ाद हैं - हर दिल ये  कह कर झूमा है आज,
जो कि  जात पात की बेड़ियों से उलझे हमारे कदम रुकते हैं आज भी,
तुम इस जात के, मैं उस जात का, हम कहने से नहीं कतराते आज भी,
खुद को समझाने का दिन आया है आज,
कहने  में कि  हम आज़ाद हैं, और आज़ाद होने का जज्बा दिखने में अंतर है मेरे दोस्त,
आजादी मन का " विश्वास " है जो  किसी के  हाथ की डोर नहीं मेरे दोस्त,
एक "सच्चे इन्सान" बन जाएँ हम, तो क्या बात है,
"हर दिन खुद का हो", तो क्या बात है,
खुद को जगाने का वक़्त आया है मेरे दोस्त,
इन्सान  को इन्सान ही रहने दो मेरे दोस्त ।।

आजादी मुबारक।। 

Tuesday, July 9, 2013

Kaash




काश वो रात वहीँ थम जाती,
काश ये सुबह कभी ना आती,
काश वो अनकही दास्ताँ कहने का वो पल आता,
काश हमेशा की तरह वो बात भी तू समझ जाता,
काश कि टकरार होती,
काश बिन मौसम ही सही, बरसात होती,
काश वो अटूट विश्वास आज  बयान हो पाता,
काश हमारे होने का फक्र, हमें समझ आता,
काश ये ख़ामोशी सिमट के भस्म हो जाती,
काश गिले शिकवों की लड़ी लव्जों में कही जाती,
काश ये इक्त्फाक हो जाता,
इस बार मैं रूठती और तू मनाता। 

Sunday, July 7, 2013

Badalte Rang




बदलते रंगबदलते ढंग,
बदलते अंदाज़बदलते ख्वाब
बदलता साज़बदलता आगाज़
बदलती खुशियों की वजहबदलती पहचान,
बदलती आनबदलती शान,
बदलती मुस्कानबदलता मेहमान,
बदलता रूठने का अंदाज़, बदलता जान कुर्बान करने का बखान,
बदलता वक़्त, बदलता इन्सान,

चारों ओर बदलता सब कुछ, नहीं बदलती फितरत - ऐ - इन्सान। 

Friday, April 26, 2013

    

    


    मैंने देखा है
    दिन को सांझ होते हुए,
    मैंने देखा है, 
    कली को फूल बनते हुए,
    मैंने देखा है,
    राह चलते मंजिल मिलते हुए,
    मैंने देखा है,
    इक्त्फाक होते हुए,
    वो बिन मौसम बरसात,
    वो रूठे बच्चे की निगाहों के जज़्बात,
    वो एक थपकी में सुकून की नींद का आना, 
    वो ख़ुशी के आंसू चलकना,
    वो रूठना - वो मनाना,
    वो अनकही बात समझ जाना,
    वो अँधेरे कमरे में मोमबत्ती की जगमगाहट, 
    वो हर एक चीज़ को आपस में बराबर हिस्सों में बाटने की आदत, 
    वो टकरार में भी परवाह का एहसास,
    मैंने देखा है,
    कोशिश करने से, हर उलझन सुलझते हुए,
    मैंने देखा है,
    ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से मिलते हुए।